धारा 143 (धारा 80) क्या है? कृषि भूमि को आवासीय या गैर-कृषि में कैसे बदलें? UP राजस्व संहिता नियम
कृषि भूमि को आवासीय बनाना: धारा 143 (अब धारा 80) की पूरी कानूनी प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश में जब किसी खेत (कृषि भूमि) पर मकान बनाना हो, प्लॉटिंग करनी हो या दुकान/फैक्ट्री खोलनी हो, तो राजस्व रिकॉर्ड में उसका लैंड यूज बदलना अनिवार्य होता है। जानिए इसकी ऑनलाइन व ऑफलाइन प्रक्रिया।
1. धारा 143 और धारा 80 में क्या अंतर है?
पहले उत्तर प्रदेश में ज़मींदारी विनाश एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 लागू था, जिसके अंतर्गत भूमि उपयोग बदलने की प्रक्रिया "धारा 143" कहलाती थी।
वर्ष 2016 में लागू हुए नए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (UP Revenue Code, 2006) के अंतर्गत पुरानी धारा 143 को अब धारा 80 (Section 80) कहा जाता है। आम बोलचाल में लोग आज भी इसे "143 कराना" या "अकृषिक (Non-Agricultural) कराना" ही कहते हैं।
2. धारा 80 (143) कराना क्यों ज़रूरी है?
- मकान निर्माण की वैधानिकता: यदि ज़मीन खतौनी में कृषि भूमि दर्ज है, तो उस पर आवासीय निर्माण अवैध माना जा सकता है। धारा 80 होने के बाद ही वह भूमि 'आबादी' के रूप में मान्य होती है।
- बैंक लोन की सुविधा: कोई भी राष्ट्रीयकृत या निजी बैंक केवल कृषि भूमि पर होम लोन नहीं देता। बैंक लोन स्वीकृत करने के लिए धारा 80 का एसडीएम (SDM) आदेश आवश्यक होता है।
- जमींदारी सीलिंग व उत्तराधिकार नियमों में छूट: अकृषिक घोषित होने के बाद उस भूमि पर कृषि सीलिंग कानून लागू नहीं होते और व्यक्तिगत उत्तराधिकार कानून लागू होते हैं।
3. कृषि भूमि को आवासीय (143) में बदलने की चरणबद्ध प्रक्रिया
- आवेदन (Application): भूमि स्वामी द्वारा संबंधित तहसील के उप-जिलाधिकारी (SDM / Assistant Collector) के न्यायालय में धारा 80 के तहत आवेदन पत्र प्रस्तुत किया जाता है (यह राजस्व परिषद के ऑनलाइन पोर्टल bor.up.nic.in से भी होता है)।
- तहसीलदार व लेखपाल की आख्या: एसडीएम द्वारा फाइल तहसीलदार को भेजी जाती है। क्षेत्रीय लेखपाल (पटवारी) और राजस्व निरीक्षक मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करते हैं कि भूमि पर खेती बंद हो चुकी है या निर्माण शुरू हो गया है।
- सरकारी फीस (Court Fee/Levy): ज़मीन के सर्किल रेट के अनुसार निर्धारित सरकारी शुल्क (सामान्यतः 1% से 2% तक उद्घोषणा शुल्क) राजकोष में चालान के माध्यम से जमा कराया जाता है।
- एसडीएम कोर्ट से आदेश (Order): शुल्क जमा होने और कोई आपत्ति न आने पर एसडीएम द्वारा धारा 80 के तहत अकृषिक घोषणा का विधिवत आदेश पारित किया जाता है।
- खतौनी में अंकन (Entry in Khatauni): आदेश की प्रति रजिस्ट्रार कानूनगो के पास जाती है और खतौनी के कॉलम में गाटा संख्या के आगे "गैर-कृषि / आबादी भूमि" दर्ज कर दिया जाता है।
4. आवश्यक दस्तावेज़ (Required Documents)
💡 ज़मीन का क्षेत्रफल या रजिस्ट्री शुल्क निकालें:
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प्लॉट खरीदते समय केवल विक्रेता की ज़बानी बातों पर भरोसा न करें। विक्रेता से एसडीएम कोर्ट द्वारा जारी धारा 80 का मूल आदेश और उस आदेश का अंकन वर्तमान खतौनी की नकल में अवश्य जांचें।